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POSTS DEPARTMENT: रेलवे मेल सर्विस को पेपरलेस बनाने की तैयारी, डाक की पूरी प्रक्रिया डिजिटल करने के लिए समिति गठित

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Alam Ki Khabar | Bihar News | Patna News | Samastipur News | डाक विभाग रेलवे मेल सर्विस और अन्य मेल कार्यालयों को पेपरलेस बनाने की तैयारी कर रहा है। उच्चस्तरीय समिति डाक की पूरी प्रक्रिया और डिजिटल सिस्टम की समीक्षा कर एक महीने में रिपोर्ट देगी।

नई दिल्ली, 29 अगस्त। डाक विभाग ने रेलवे मेल सर्विस यानी RMS और अन्य मेल कार्यालयों के कामकाज को कागज से डिजिटल व्यवस्था की ओर ले जाने की तैयारी तेज कर दी है। विभाग ने इस बदलाव की रूपरेखा तैयार करने के लिए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है। समिति मौजूदा कागजी प्रक्रियाओं की समीक्षा करने के साथ यह बताएगी कि मेल संचालन के किन-किन चरणों को पूरी तरह डिजिटल किया जा सकता है।

डाक विभाग का यह कदम केवल कागज के इस्तेमाल को कम करने तक सीमित नहीं है। प्रस्तावित व्यवस्था में डाक की प्राप्ति से लेकर उसके प्रसंस्करण, एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने, डिस्पैच और डिलीवरी तक की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल माध्यम से संचालित करने की संभावनाओं पर काम किया जाएगा।

समिति को अपनी रिपोर्ट कार्यालय ज्ञापन जारी होने की तारीख से एक महीने के भीतर सौंपनी है। डाक विभाग ने इस संबंध में 24 अगस्त 2026 को कार्यालय पत्र जारी किया है।

कागजी रिकॉर्ड की जगह डिजिटल व्यवस्था पर जोर

RMS में डाक से जुड़े कई चरणों पर रिकॉर्ड और दस्तावेज तैयार किए जाते हैं। नई पहल का उद्देश्य इन प्रक्रियाओं की समीक्षा कर यह तय करना है कि कहां कागजी दस्तावेज की जरूरत वास्तव में जरूरी है और किन कार्यों को डिजिटल रिकॉर्ड के माध्यम से पूरा किया जा सकता है।

समिति मेल कार्यालयों में इस्तेमाल होने वाली मौजूदा प्रक्रियाओं और रिकॉर्ड व्यवस्था का अध्ययन करेगी। इसके बाद पेपरलेस कामकाज के लिए व्यावहारिक मॉडल तैयार करने की सिफारिश की जाएगी।

डाक की यात्रा भी होगी डिजिटल

प्रस्तावित व्यवस्था का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा डाक के पूरे संचालन को डिजिटल तरीके से ट्रैक और मैनेज करने से जुड़ा है। डाक कार्यालय में पहुंचने के बाद उसकी प्रोसेसिंग, ट्रांसमिशन, डिस्पैच और डिलीवरी तक के चरणों में डिजिटल सिस्टम की भूमिका बढ़ाने पर विचार किया जाएगा।

इससे कागजी रिकॉर्ड पर निर्भरता घटाने के साथ सूचनाओं को तेजी से साझा करने में भी मदद मिल सकती है। एक चरण पर दर्ज जानकारी दूसरे चरण में डिजिटल माध्यम से उपलब्ध होने पर कर्मचारियों को बार-बार कागजी रिकॉर्ड देखने की जरूरत कम हो सकती है।

अलग-अलग सॉफ्टवेयर को जोड़ने पर भी विचार

RMS में इस्तेमाल होने वाले विभिन्न एप्लीकेशन और सॉफ्टवेयर की भी समिति समीक्षा करेगी। अलग-अलग डिजिटल प्रणालियां आपस में किस तरह बेहतर तरीके से जुड़ सकती हैं, इसकी संभावनाओं का अध्ययन किया जाएगा।

इस प्रक्रिया को इंटरऑपरेबिलिटी से जोड़ा गया है। यानी अलग-अलग सिस्टम के बीच जरूरी जानकारी का आदान-प्रदान आसान हो और एक ही जानकारी को अलग-अलग जगहों पर दोबारा दर्ज करने की जरूरत कम हो।

समिति सिर्फ तकनीकी पहलू नहीं देखेगी

पेपरलेस व्यवस्था तैयार करना केवल नया सॉफ्टवेयर बनाने का मामला नहीं है। डाक विभाग की समिति इस बदलाव से जुड़े संचालन संबंधी पहलुओं को भी देखेगी। मेल कार्यालयों में काम करने वाले कर्मचारियों की व्यावहारिक जरूरतों और मौजूदा प्रक्रिया में आने वाली दिक्कतों को भी अध्ययन का हिस्सा बनाया जाएगा।

समिति जरूरत पड़ने पर डाक संचालन के विशेषज्ञों को भी अपने साथ जोड़ सकती है। इसके अलावा संबंधित डिवीजन, विंग और सर्किल से संचालन संबंधी सुझाव लिए जाएंगे।

डिजिटल रिकॉर्ड की विश्वसनीयता भी अहम

कागजी रिकॉर्ड हटाकर डिजिटल व्यवस्था लागू करने के साथ रिकॉर्ड की प्रमाणिकता बनाए रखना भी बड़ी चुनौती होगी। इसलिए समिति डिजिटल रिकॉर्ड के निर्माण, प्रमाणीकरण, रखरखाव और जरूरत पड़ने पर पुराने रिकॉर्ड को तुरंत खोजने की व्यवस्था पर भी सुझाव देगी।

इससे यह सुनिश्चित करने की कोशिश होगी कि पेपरलेस व्यवस्था में महत्वपूर्ण डाक रिकॉर्ड सुरक्षित रहें और जरूरत के समय उन्हें आसानी से उपलब्ध कराया जा सके।

तकनीकी बाधाओं की भी होगी पहचान

नई डिजिटल व्यवस्था लागू करते समय नेटवर्क, सॉफ्टवेयर, डेटा प्रबंधन, सिस्टम के बीच तालमेल और कर्मचारियों के प्रशिक्षण जैसी चुनौतियां सामने आ सकती हैं। समिति इन संभावित तकनीकी और संचालन संबंधी बाधाओं की पहचान करेगी।

इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि ऐसी समस्याओं को दूर करने के लिए किस तरह की व्यवस्था विकसित की जानी चाहिए। लक्ष्य ऐसा सिस्टम तैयार करना है जिसे मेल कार्यालयों के रोजमर्रा के काम में व्यावहारिक रूप से लागू किया जा सके।

पेपरलेस व्यवस्था की निगरानी भी होगी

डिजिटल सिस्टम लागू होने के बाद केवल उसे शुरू कर देना पर्याप्त नहीं होगा। उसके इस्तेमाल और अनुपालन की निगरानी के लिए भी एक प्रभावी मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार करने की सिफारिश समिति करेगी।

इसका उद्देश्य यह देखना होगा कि निर्धारित डिजिटल प्रक्रियाओं का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं और कहीं पुराने कागजी तरीके दोबारा तो इस्तेमाल नहीं किए जा रहे हैं।

सीईपीटी निदेशक करेंगे समिति का नेतृत्व

उच्चस्तरीय समिति की अध्यक्षता सीईपीटी के निदेशक विष्णु अंबरीश करेंगे। समिति को डाक संचालन से जुड़े विभिन्न स्तरों से जानकारी और सुझाव लेने का अधिकार होगा।

डाक विभाग की कोशिश है कि पेपरलेस RMS की रूपरेखा तैयार करते समय तकनीकी समाधान के साथ जमीनी स्तर की जरूरतों को भी ध्यान में रखा जाए।

एक महीने में सामने आएगा रोडमैप

24 अगस्त को जारी कार्यालय पत्र के बाद समिति के पास अपनी रिपोर्ट तैयार करने के लिए एक महीने का समय है। रिपोर्ट में यह बताया जाएगा कि RMS और अन्य मेल कार्यालयों को पेपरलेस बनाने के लिए मौजूदा व्यवस्था में किन बदलावों की जरूरत होगी।

रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया तय की जा सकती है। यानी अभी पेपरलेस व्यवस्था को अंतिम रूप से लागू नहीं किया गया है, बल्कि उसके लिए तकनीकी और संचालन संबंधी रोडमैप तैयार करने का काम शुरू हुआ है।

तेज और पारदर्शी डाक व्यवस्था की दिशा में कदम

डाक विभाग की योजना सफल होती है तो आने वाले समय में RMS और मेल कार्यालयों में कागजी रिकॉर्ड की भूमिका काफी कम हो सकती है। डाक के अलग-अलग चरणों में डिजिटल रिकॉर्ड बढ़ने से कामकाज को अधिक व्यवस्थित करने, सूचना साझा करने और रिकॉर्ड खोजने में सुविधा मिलने की उम्मीद है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विभाग पेपरलेस व्यवस्था को केवल कागज बचाने की पहल के रूप में नहीं देख रहा, बल्कि मेल संचालन की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाने की दिशा में इसे एक व्यापक बदलाव के तौर पर आगे बढ़ा रहा है।

अब समिति की रिपोर्ट इस पूरी योजना का अगला महत्वपूर्ण पड़ाव होगी। रिपोर्ट में आने वाली सिफारिशों से यह तस्वीर साफ होगी कि RMS को पेपरलेस बनाने के लिए किस तरह की तकनीकी व्यवस्था, संचालन प्रणाली और निगरानी तंत्र तैयार किया जाएगा।

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कागज से डिजिटल सिस्टम तक बदल रही डाक की कार्यप्रणाली

डाक विभाग की पेपरलेस RMS पहल केवल तकनीक बदलने का प्रयास नहीं है, बल्कि काम करने के तरीके में बदलाव की तैयारी है। दशकों से कागजी रिकॉर्ड के सहारे चलने वाली प्रक्रियाओं को डिजिटल रूप में बदलने के लिए सिस्टम, कर्मचारी और संचालन व्यवस्था तीनों को साथ लेकर चलना होगा।

डिजिटल रिकॉर्ड से काम तेज हो सकता है, लेकिन रिकॉर्ड की सुरक्षा, डेटा की विश्वसनीयता और सिस्टम की उपलब्धता उतनी ही महत्वपूर्ण होगी। यदि विभाग इन पहलुओं पर मजबूत व्यवस्था तैयार करता है तो पेपरलेस मॉडल मेल संचालन में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने वाला साबित हो सकता है।

डाक की पूरी यात्रा डिजिटल बनाने की तैयारी

रेलवे मेल सर्विस को पेपरलेस बनाने के लिए डाक विभाग ने उच्चस्तरीय समिति बनाई है। समिति RMS और अन्य मेल कार्यालयों में चल रही कागजी प्रक्रियाओं की समीक्षा करेगी।

डाक की प्राप्ति, प्रोसेसिंग, ट्रांसमिशन, डिस्पैच और डिलीवरी को डिजिटल बनाने की संभावनाएं तलाशी जाएंगी। अलग-अलग सॉफ्टवेयर के एकीकरण, डिजिटल रिकॉर्ड के प्रमाणीकरण और मॉनिटरिंग सिस्टम पर भी सुझाव दिए जाएंगे।

समिति को 24 अगस्त 2026 के कार्यालय ज्ञापन के बाद एक महीने के भीतर रिपोर्ट देनी है।

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